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तेजस्वी यादव एक्टिव मोड में, RJD में संगठनात्मक बदलाव की तैयारी; 55 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर मंथन?

 पटना: 


बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी में जुट गया है। नेता प्रतिपक्ष और RJD नेता तेजस्वी यादव पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं और 55 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर मंथन जारी है।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार और उसके बाद संगठन को लेकर उठे सवालों के बीच तेजस्वी यादव ने जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर की कमेटियों को भंग कर नए सिरे से संगठन तैयार करने का फैसला लिया था। अब इसी प्रक्रिया के तहत नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है।

संगठन में अनुशासन पर रहेगा जोर

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नए संगठन में अनुशासन और सक्रियता को प्राथमिकता दी जा सकती है। साथ ही संगठन की कमजोरियों को दूर करने और जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर भी फोकस रहने की संभावना है।

नए जिलाध्यक्षों के चयन में युवा चेहरे, संगठन के प्रति सक्रियता और साफ छवि जैसे पहलुओं को महत्व दिए जाने की चर्चा है।

55 जिलाध्यक्षों के लिए क्या हो सकता है नया फॉर्मूला?

RJD के नए संगठनात्मक ढांचे को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। संभावित फॉर्मूले के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में कुछ प्रमुख बातों को ध्यान में रखा जा सकता है।

55 साल से कम उम्र के नेताओं को प्राथमिकता

जिलाध्यक्ष पद के लिए उम्र को एक महत्वपूर्ण मानक बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि 55 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है।

जिलाध्यक्ष बनने के बाद चुनाव लड़ने पर रोक?

नए संगठनात्मक फॉर्मूले में यह भी चर्चा है कि जिलाध्यक्ष बनाए जाने वाले नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी पर पूरा ध्यान देने के लिए चुनावी राजनीति से अलग रखा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व की ओर से लिया जाना बाकी है।

युवाओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

RJD संगठन में युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी में है। पार्टी के अंदर युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है।

तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की भी है।

प्रशांत किशोर की सक्रियता ने बढ़ाई चुनौती?

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की सक्रियता को भी RJD के लिए एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हुई है।

ऐसे में RJD के लिए संगठन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब किन चेहरों को मिलेगी जिम्मेदारी?

तेजस्वी यादव की अगुवाई में तैयार होने वाली नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 55 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद प्रखंड और पंचायत स्तर पर भी संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकता है।

अब देखना होगा कि RJD का नया संगठनात्मक फॉर्मूला पार्टी को कितना मजबूत करता है और आने वाले राजनीतिक मुकाबलों में इसका कितना असर दिखाई देता है।

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